समुद्र तल से तीन हज़ार मीटर से भी ज़्यादा ऊँचाई, जहाँ बारिश होती नहीं और हरियाली विरल है, बंजर और पथरीली ज़मीन के बीच रहने वालों की ज़िंदगी हर दिन किसी नई चुनौती से कम नहीं. क़ुदरती नज़ारे देखकर लौट आने वाले सैलानियों के तरीक़े के बरक्स गौरांग ने लेह-लद्दाख के अपने सफ़र के दौरान वहाँ के सीधे-सरल, मेहनती और हँसमुख लोगों की सोहबत को तरजीह दी. चेहरों की यह श्रंखला तस्वारों के उनके बड़े संग्रह का एक हिस्सा है. उनकी ये तस्वीरें विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस के मौक़े पर ‘फ़ोटोविज़न’ की तरफ़ से कल आयोजित प्रदर्शनी में भी देखी जा सकती हैं.
बच्चों की तस्वीरें बनाना गौरांग को ख़ासतौर पर भाता है. और अब तो यह विधा उनकी पहचान बन गई है. वह अपनी दुनिया को अलग नज़रिये से देखने क़ायल हैं. बरेली में रहते हैं.